Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 25, Verse 70
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 25, verse 70 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 25 · श्लोक 70
संस्कृत श्लोक
प्राणापानोद्भवस्थाने बाह्याभ्यन्तरमास्थिते ।
ये द्वे योगिपदाधारस्तच्चित्तत्त्वमुपास्महे ॥ ७० ॥
हिन्दी अर्थ
बाह्य ओर आभ्यन्तर
प्रदेश मेँ स्थित, योगियों द्वारा अनुभूत होनेवाले जो दो प्राण ओर अपान की उत्पत्ति के स्थान है,
उन दोनों के अधिष्ठानभूत चित्तत्त्व की हम उपासना करते हैं