Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 25, Verse 73
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 25, verse 73 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 25 · श्लोक 73
संस्कृत श्लोक
प्राणापानपरामर्शं सत्ताबोधं विरूपकम् ।
यत्प्राप्यं प्राणमननात्तच्चित्तत्त्वमुपास्महे ॥ ७३ ॥
हिन्दी अर्थ
जो प्राण ओर अपान के चैतन्य में हेतुभूत हैं, जो उनके अस्तित्व का ज्ञान
करानेवाले है, जो स्वयं रूपवर्जित है एवं जो प्राणोपासना से प्राप्तव्य हे, उस चित्तत्त्व की हम
उपासना करते हैं