Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 25, Verse 74
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 25, verse 74 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 25 · श्लोक 74
संस्कृत श्लोक
यत्प्राणपवनस्पन्दो यत्स्पन्दानन्दकारकम् ।
कारणं कारणानां यत्तच्चित्तत्त्वमुपास्महे ॥ ७४ ॥
हिन्दी अर्थ
ब्रह्मन्, जो प्राण वायु के स्पन्दन में हेतुभूत है, जो इन्द्रियों के होनेवाले
विषयप्रदेश-पर्यन्त गमन में तथा उनके उपभोग में हेतुभूत है तथा जो कारणों का भी कारण है, उस
चित्तत्तत्की हम उपासना करते हैं