Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 26, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 26, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 26 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
न स्तौमि न च निन्दामि क्वचित्किंचित्कदाचन ।
आत्मनोऽन्यस्य वा साधो तेनाहं शुभमागतः ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे
साधो, किसी समय कहीं पर अपने या दूसरे किसी के कार्यो की न तो कुछ स्तुति करता हूँ ओर न कुछ
निन्दा ही करता हूँ। इसलिए मैंने यह दीर्घं जीवन प्राप्त किया है