Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 26, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 26, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 26 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
न तुष्यति शुभप्राप्तौ नाशुभेष्वपि खिद्यते ।
मनो मम समं नित्यं तेनाहं शुभमागतः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
महर्षे, मेरा मन इष्ट वस्तुओं की
प्राप्ति होने पर न सन्तुष्ट होता है ओर न तो अनिष्ट वस्तुओं की प्राप्ति होने पर कभी खिन्न होता हे,
वह निरन्तर एकरूप ही रहता है, इसलिए मैं इस दीर्घ जीवन को प्राप्त हुआ हूँ