Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 26, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 26, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 26 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
परमं त्यागमालम्ब्य सर्वमेव सदैव हि ।
जीवितादि मया त्यक्तं तेनाहं शुभमागतः ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
चूँकि समस्त द्वैत
के बाध रूप उत्तम त्याग का अवलम्बन कर सर्वदा ही जीवन के अभिमान आदि सभी वस्तुओं का मैंने
परित्याग कर दिया है, अतः इस दीर्घ जीवन को प्राप्त हुआ हूँ