Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 26, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 26, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 26 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
प्रशान्तचापलं वीतशोकं स्वस्थं समाहितम् ।
मनो मम मुने शान्तं तेन जीवाम्यनामयः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मुने, मेरे मन की चपलता
विलीन हो गई हे । वह शोक से रहित हो गया है, स्वस्थ, समाहित एवं शान्त हो चुका है, इसलिये मैं
विकारवर्जित होकर जी रहा हूँ