Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 26, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 26, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 26 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
किमद्य मम संपन्नं प्रातर्वा भविता पुनः ।
इति चिन्ताज्वरो नास्ति तेन जीवाम्यनामयः ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
आज मैंने
क्या प्राप्त किया ओर कल प्रातः मुञ्चे क्या प्राप्त होगा, इस प्रकार चिन्तारूपी ज्वर से मेँ निर्मुक्त हूँ,
इसीलिए अनामय होकर मैं जी रहा हू