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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 26, Verse 23

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 26, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 26 · श्लोक 23

संस्कृत श्लोक

इमं सांसारमारम्भं सुषुप्तपदवत्स्थितः । असन्तमिव जानामि तेन जीवाम्यनामयः ॥ २३ ॥

हिन्दी अर्थ

महाराज, विकारवर्जित अवस्था में स्थित हुआ मैं इस संसार में उत्पन्न घट आदि कार्यविशेषों को तुच्छ-सा (मिथ्या) ही जानता हूँ, इसलिए विकाररहित होकर जी रहा हूँ