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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 26, Verse 24

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 26, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 26 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

यथाकालमुपायातावर्थानर्थौ समौ मम । हस्ताविव शरीरस्थौ तेन जीवाम्यनामयः ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

प्रारब्ध के द्वारा प्रस्तुत किये गये उपभोग-समय में प्राप्त हुए इष्ट और अनिष्ट पदार्थ मेरी दृष्टि में, देहवर्ती हाथों की नाई, समान ही हैं, इसलिये मैं विकारवर्जित होकर जी रहा हूँ