Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 26, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 26, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 26 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
यदा यदा मुने किंचिद्विजानामि तदा तदा ।
मतिरायाति नौद्धत्यं तेन जीवाम्यनामयः ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मुने, जब-जब मैं कुछ जानता हूँ, तब-तब मेरा मन अविनीतभाव को
प्राप्त नहीं होता । इसलिए अनामय होकर जीवित रहता हूँ