Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 26, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 26, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 26 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
करोमीशोऽपि नाक्रान्तिं परितापे न खेदवान् ।
दरिद्रोऽपि न वाञ्छामि तेन जीवाम्यनामयः ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज, यद्यपि मैं दूसरों के ऊपर
आक्रमण करने में समर्थ हूँ, तथापि मैं आक्रमण (परिभव) नहीं करता, दूसरों के द्वारा खेद पहुँचाये
जाने पर भी सहनशीलता के कारण खिन्न नहीं होता एवं दरिद्र होने पर भी कुछ नहीं चाहता, इसलिए
अनामयरूप से दीर्घजीवी हूँ