Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 26, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 26, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 26 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
प्राणापानानुसरणात्परमात्मावलोकनात् ।
अशोकमनुजातोऽस्मि पदमाद्यं महातपः ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे तपस्वियो में महान, प्राण ओर अपान के अनुसरण से प्राप्त परम तत्त्व के साक्षात्कार से मैं
समस्त शोको से वर्जित आदिकारण परम पद को प्राप्त हो गया हूँ