Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 26, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 26, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 26 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
यथा प्राप्तेषु कार्येषु परित्यक्तफलैषणः ।
सुषुप्तसमया बुद्ध्या परितिष्ठामि केवलम् ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
ब्रह्मन्, व्यवहारवश यथा समय जो भी कर्तव्य प्राप्त हो जाते हैं, उनका फल की अभिलाषाओं को
छोड़कर निरभिमानबुद्धि से केवल अनुष्ठान करता रहता हूँ