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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 26, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 26, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 26 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

न भूतं न भविष्यं च चिन्तयामि कदाचन । दृष्टिमालम्ब्य तिष्ठामि वर्तमानामिहात्मना ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

महाराज, मैं कभी अतीत एवं अनागत विषयों का चिन्तन नहीं करता, एकमात्र नित्य वर्तमानस्वभाव साक्षिचैतन्यस्वरूप दृष्टि का अपने मन से अवलम्बन कर इस कल्पतरु वृक्ष पर अवस्थित रहता हूँ