Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 27, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 27, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 27 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
इति संकथितं चित्रं भुशुण्डोदन्तमुत्तमम् ।
श्रुत्वा विचार्य चैवान्तर्यद्युक्तं तत्समाचर ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
उपसंहार करते है।
हे श्रीरामजी, इस प्रकार का विचित्र उत्तम भुशुण्ड-वृत्तान्त मैने आपसे कहा । उसका श्रवण ओर
भीतर से मनन कर जो उचित हो, उसका अनुष्ठान कीजिए