Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 27, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 27, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 27 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
मध्ये त्रेतायुगस्यास्य जातस्त्वं रिपुमर्दन ।
पुनरद्याष्टमे वर्षे तत्रैवोपरि भूभृतः ।
मिलितोऽभूद्भुशुण्डो मे तथेवाजररूपवान् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, आजकल वर्तमान
समय में सत्ययुग क्षीण होने पर त्रेतायुग चल रहा है ओर हे रिपुमर्दन, इस त्रेतायुग के बीच में आपने
जन्म लिया हे ॥१८।॥ हे श्रीरामजी, आज से आठ वर्ष पहले सुमेरुपर्वत के उसी शिखर के ऊपर ज्यो-
का-त्यों अजररूपधारी वह भुशुण्ड मुझसे फिर मिला था