Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 28, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
परमार्थावबोधाय दोषापाकरणाय च ।
श्रृणु राघव तत्त्वेन वक्ष्यमाणमिदं मया ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज वसिष्ठजी ने कहा : हे राघव, परब्रह्मरूप
परमार्थ तत्त्व को जानने के लिए तथा संसार हेतु अनेक दोषों के विनाश के लिए मेरे द्वारा तत्त्वतः
कहे जानेवाले इस उपदेश को आप सुनिए