Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 28, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
अस्थिस्थूणं नवद्वारं रक्तमांसावलेपनम् ।
शरीरसदनं राम न केनचिदिदं कृतम् ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
पहले प्रश्न का उत्तर देते हैं।
हे श्रीरामजी, इस शरीररूपी घर का जिसमें हड्डियाँ ही खम्भे हैं, मुख आदि नव दरवाजे हैं और जो
रक्त ओर मांस से लिपा गया है - वास्तव में किसीने भी निर्माण नहीं किया हे