Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 28, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
परिभ्रमसि हे राम स देहस्ते क्व संस्थितः ।
जागरायां मनोराज्ये येन स्वर्गपुरान्तरम् ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
जाग्रत-दशा में भी मनोराज्य में जिस देह से स्वर्गीय नगरों के अन्दर या मेरुपर्वत पर आप परिभ्रमण
करते हैं, वह आपकी देह कहाँ स्थित है ?