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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 23

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 28, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 23

संस्कृत श्लोक

परिभ्रमसि हे राम स देहस्ते क्व संस्थितः । मनोराज्यं मनोराज्ये महद्विभवभूमिषु ॥ २३ ॥

हिन्दी अर्थ

हे महाबाहो, मनोराज्य के भीतर कल्पित दूसरे मनोराज्य में बड़ी-बड़ी विभवपूर्णभूमियों में जिस देह से आप परिभ्रमण करते हैं, वह आपकी देह कहाँ स्थित है ?