Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 28, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
प्रकरोषि महाबाहो ते देहास्ते क्व संस्थिताः ।
विलासिन्यानुरागिण्या येन संकल्पकान्तया ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी,
विलासनिपुण तथा अनुराग युक्त संकल्प कान्ता के साथ जिस देह से रति-सुख का अनुभव करते
हैं, वह आपकी देह कहाँ स्थित है ?