Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 28, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
निर्वृतिं यासि देहेन स देहस्ते क्व संस्थितः ।
एते राम यथा देहा मनसः सदसन्मयाः ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
उन स्वप्न-वेह आदि में मिथ्यात्व एवं कल्पितत्व आदि का निश्चय होने के कारण प्रस्तुत देह में भी
उसका साधन करते हैं।
हे श्रीरामजी, ये शरीर जिस प्रकार मानसिक संकल्प से जनित सत् और असत्रूप हैं, ठीक उसी
प्रकार यह प्रस्तुत शरीर भी मानसिक संकल्प से जनित, सद्रूप, असद्रूप है और वैसा ही आचरण
करनेवाला है