Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 36
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 28, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
अन्यथा भाव्यते राम भूयते तदिहान्यथा ।
अयं सोऽयं ममायं च संसार इति भाविते ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, "यह
वह हे", "यह मेरा है” और “यह मेरा संसार है” इस प्रकार भावित होनेपर देहादि जगद्रूप संकल्प जो
सत्य-सा प्रतीत होता है, वह केवल सुदृढ़ भावना से ही होता है