Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 28, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
असक्तबुद्धयः सर्वे भुशुण्डवदवस्थितिम् ।
प्राप्नुवन्ति परे तत्त्वे प्राणापानावलोकिनः ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
उक्त प्राण और अपान की उपासना करनेवाले सभी अनासक्त, भुशुण्ड की नाई, परमपद
में स्थिति प्राप्त करते हैं