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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 28, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

एता विचित्रा भवता श्रुता विज्ञानदृष्टयः । इदानीं धियमालम्ब्य यथेच्छसि तथा कुरु ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामजी, इस सब विचित्र विज्ञानोपासनाओं का आपने श्रवण किया । अब बुद्धि का अवलम्बन कर जैसा चाहें, वैसा करें यानी अपनी आत्मनिष्ठा योगपूर्वक या उपासनापूर्वक जैसी चाहें वैसी करें