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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 28, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

श्रीराम उवाच । भगवन्भवता भूमिभास्वता ज्ञानरश्मिभिः । हार्दमुद्दामदौरात्म्यं प्रमृष्टमखिलं तमः ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

योग और उपासना की कथा जाने दीजिए महाराज, हमें तो एकमात्र आपके उपदेश के श्रवण से ही तत्त्वज्ञान प्राप्त हो चुका है, यो सूचन कर रहे श्रीरामचन्द्रजी कथा प्रसंग से प्राप्त हुए देहरूपी घर के केवल स्वरूप की ही जिज्ञासा से पुनः प्रश्न करते हैं। श्रीरामजी ने कहा : भगवन्‌, पृथिवी में अवतीर्ण हुए दूसरे सूर्य के सदुश आपने ज्ञान की किरणों से हृदयगत समस्त अन्धकार का, जो अनात्मपदार्थो में स्वात्मबुद्धि तथा तज्जनित दुष्टचेष्टारूपी निरंकुश दुर्जनता का सम्पादक था, विनाश कर डाला