Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 55
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 28, verse 55 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 55
संस्कृत श्लोक
इत्यात्ममरणप्राप्तौ किं मुधा परितप्यसे ।
अवश्यमेव जातेन किंचित्सुविभवादिकम् ॥ ५५ ॥
हिन्दी अर्थ
उत्पन्न हुआ पुरुष कुछ न कुछ उत्तम वैभव आदि अवश्य ही प्राप्त
करेगा, इसलिए हर्ष का अवसर ही क्यों ?