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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 60

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 28, verse 60 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 60

संस्कृत श्लोक

देहोऽयं चित्रदोषोत्थः किमन्यत्परिदेव्यते । देहाच्चेदन्य एवाहं चिदाभासस्तदङ्ग हे ॥ ६० ॥

हिन्दी अर्थ

हे भद्र, यदि "अहम्‌" पदार्थ शरीर से पृथक ही है, यह मान लिया जाय, तो वह अविद्या-दोष से जनित चिदाभास ही है। वे देह और चिदाभास, जो सदसदात्मक हैं, मेरे कौन होते हैं, जिनके विषय में शोक किया जाय ?