Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 64
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 28, verse 64 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 64
संस्कृत श्लोक
सुरज्ज्वेव बलीवर्दो बध्यते जन्तुरास्थया ।
अतस्त्वया दृढमिदमिति निर्णीय बुद्धितः ॥ ६४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे अनघ, इसलिए
“यह सब ब्रह्मरूप ही है” इस प्रकार पूर्वोक्त युक्तियों से सुदृढ निश्चय कर आप आसक्ति-शून्य बुद्धि
से इस संसार मेँ विहार कीजिए