Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 71
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 28, verse 71 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 71
संस्कृत श्लोक
नेदमाडम्बरं व्यर्थमनर्थायावभासते ।
अहमेव हि वा सर्वं चिदित्येवं विभाविते ॥ ७१ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र,
अथवा मँ ओर यह सब प्रपंच चैतन्यात्मक परब्रह्मस्वरूप ही है” इस प्रकार चिन्तन करने पर यह
निरर्थक जगद्रूप आडम्बर अनर्थ के लिए प्रतीत नहीं होता