Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 72
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 28, verse 72 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 72
संस्कृत श्लोक
नेदमाडम्बरं व्यर्थमनर्थायावभासते ।
दर्शनद्वयमप्येतत्सत्यमत्यन्तसिद्धिदम् ॥ ७२ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, ये दोनों भी दर्शन
सत्यरूप और आत्यन्तिक-सिद्धि (मुक्तिरूप सिद्धि) देनेवाले हैं, इसलिये इन दोनों मे से आप जिस
एक को अपने लिए रम्य (योग्य) समझें, उसका अनुष्ठान करे