Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 82
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 28, verse 82 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 82
संस्कृत श्लोक
संसाररचना सर्वा संसक्तं पातयत्यलम् ।
न धनं न जनो नात्मा सत्यं राघव वस्तुतः ॥ ८२ ॥
हिन्दी अर्थ
हे राघव,
न धन, नजन और न मन ही वास्तव में सत्यस्वरूप है, किन्तु आगे कही जानेवाली युक्ति से मिथ्यारूप
से निश्चित हुआ सब यह प्रपंच मिथ्या ही दीख पड़ता हे