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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 85

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 28, verse 85 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 85

संस्कृत श्लोक

इतीयमङ्ग संसाररचना तेन मा भ्रम । भूताजवं जवीभावमिममाततमाकुलम् ॥ ८५ ॥

हिन्दी अर्थ

यह संसार प्राणियों के वेगपूर्वक गमन आगमन से पूर्ण, विस्तृत एवं उपद्रवो से भरा है, इसलिये विद्वान लोग उसे गन्धर्वनगर की रचना-विलास के सदृश तुच्छ कहते हैं