Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 86
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 28, verse 86 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 86
संस्कृत श्लोक
गन्धर्वपुरनिर्माणविलासेन समं विदुः ।
स्वप्नसंकल्पपुरवदसदेवेदमुत्थितम् ॥ ८६ ॥
हिन्दी अर्थ
से सभी जगह अवस्थित है ओर सुषुप्त की नाई स्वप्नभावापन्न है