Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 89
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 28, verse 89 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 89
संस्कृत श्लोक
तदेनां विततां निद्रां घनाज्ञानमयात्मिकाम् ।
त्यजालक्ष्मीमिवावाप्तनिधानः पुरुषोत्तमः ॥ ८९ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, अब आप प्रबुद्ध हो जाइए और सदा उदित-स्वभाव, अशेष विकल्पों से वर्जित चैतन्य-
प्रकाशस्वरूप अपनी आत्मा को उस प्रकार देखिए, जिस प्रकार प्रातःकाल में कमल सूर्य को देखता
है