Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 90
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 28, verse 90 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 90
संस्कृत श्लोक
प्रबोधमेहि पश्य स्वमात्मानमुदितं सदा ।
निर्विकल्पं चिदाभासं प्रातःपद्मं रविं यथा ॥ ९० ॥
हिन्दी अर्थ
हे महाबाहो, मैं आपको बार-बार संबोधित करता हू कि आप जाग जाइए, जाग जाइए ओर
अपने निर्मल आत्मरूपी सूर्य को देखिए