Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 91
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 28, verse 91 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 91
संस्कृत श्लोक
प्रबुध्यस्व प्रबुध्यस्व पुनःपुनरयं मया ।
प्रबोध्यसे महाबाहो पश्यात्मार्कमनामयम् ॥ ९१ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, मधुर गर्जन के सदुश उपदेश के शब्दों से
सम्पन्न, मेघ स्थानीय इस मेरे द्वारा बरसाये गये शीतल इसी ज्ञानरूपी जल से आप जगाये गये है