Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 92
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 28, verse 92 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 92
संस्कृत श्लोक
मयैतेनाभिवृष्टेन शीतेन ज्ञानवारिणा ।
सुशब्दशालिना राम ह्यनेनैवासि बोधितः ॥ ९२ ॥
हिन्दी अर्थ
हे राघव, आप आज ही प्रबुद्ध होकर आत्मज्ञान को प्राप्त कीजिए ओर इस तुच्छ जागतिक भ्रम का
परित्याग कर त्रिकालाबाधित आत्मतत्व का साक्षात्कार कीजिए