Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 93
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 28, verse 93 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 93
संस्कृत श्लोक
बोधमासादय परं प्रबोधोऽद्यैव राघव ।
सत्यमालोकयालीकं त्यक्त्वेमं जागतं भ्रमम् ॥ ९३ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी, न आपका जन्म हे,
न आपको दुःख है, न आपके दोष हैं और न आपके भ्रम ही है, (अतः) समस्त संकल्पात्मक इस संसार
का उत्सर्ग कर अपने आत्मस्वरूप में दृढ़ आसन बाँध कर स्थित हो जाइए