Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 29, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
निजं प्रयत्नमाश्रित्य चित्तमादौ निरोधयेत् ।
आविरिञ्चात्प्रवृत्तेन भ्रमेणाज्ञानरूपिणा ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
हे अनघ, ब्रह्माजी से लेकर चले आ रहे
इस अज्ञानरूपी विभ्रम से यह असद्रूप ही प्रपंच सत्-सा प्रतीत हो रहा है