Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 29, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
असदेव सदाभासमिदमालक्ष्यतेऽनघ ।
अज्ञानभ्रमविस्तारमात्रकाकृतयोऽनघ ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
हे पापशून्य राघव,
एकमात्र अज्ञानरूपी भ्रम से विस्तार को प्राप्त हुए दृश्य जगत के आधारभूत ये संकल्प से उत्पन्न शरीर
यहाँ यत्र-तत्र घूम रहे हैं