Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 102
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 29, verse 102 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 102
संस्कृत श्लोक
नानाविधेर्नमस्कारैः स्तोत्रैश्चाभ्यर्चितः शिवः ।
ततो भगवती गौरी तादृश्यैव सपर्यया ॥ १०२ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर मैने शिवजी की पूजा के सदृश ही पूजा से सखियों से युक्त तथा गण
मण्डल से परिवेष्टित भगवती गौरी का उत्तम रीति से पूजन किया