Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 103
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 29, verse 103 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 103
संस्कृत श्लोक
संपूजिता सखीयुक्ता गणमण्डलिका तथा ।
पूजान्ते पूर्णशीतांशुरश्मिशीतलया गिरा ॥ १०३ ॥
हिन्दी अर्थ
पूजा की समाप्ति होने पर
उनकी आज्ञा से पुष्पमय शिखर पर बैठे हुए मुझसे अर्धचन्द्र की कला धारण करनेवाले भगवान उमापति
परिपूर्ण हिमांशु-किरण के सदृश शीतल वाणी से कहने लगे