Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 106
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 29, verse 106 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 106
संस्कृत श्लोक
कच्चित्प्राप्यमनुप्राप्तं कच्चिच्छाम्यन्ति भीतयः ।
एवंवादिनि देवेशे सर्वलोकैककारिणि ॥ १०६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे रघुनन्दन,
समस्त लोकों के एकमात्र हेतु देवाधिदेव महादेवजी के उस प्रकार कहने के अनंतर विनययुक्त वाणी से
मैंने उनसे निवेदन किया