Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 111
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 29, verse 111 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 111
संस्कृत श्लोक
तनोति चैष्यतो बीजं त्वदनुस्मरणं प्रभो ।
ज्ञानामृतैककलशो धृतिज्योत्स्नानिशाकरः ॥ १११ ॥
हिन्दी अर्थ
हे प्रभो,
आपका अनुस्मरण ज्ञानरूपी अमृत का एकमात्र आधारभूत कलश है, धृतिरूपी ज्योत्स्ना के लिए
चन्द्रमा है ओर मोक्षरूपी नगर का द्वार हे