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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 112

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 29, verse 112 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 112

संस्कृत श्लोक

अपवर्गपुरद्वारं त्वदनुस्मरणं प्रभो । त्वदनुस्मरणोदारचिन्तामणिमता मया ॥ ११२ ॥

हिन्दी अर्थ

हे समस्त भूतो के अधिपते, आपके निरन्तर चिन्तनरूपी उदार चिन्तामणि से शोभित मैंने समस्त वर्तमान ओर भविष्य कालीन आपत्तियों के सिर पर अपना पैर रख दिया है