Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 113

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 29, verse 113 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 113

संस्कृत श्लोक

सर्वासामापदां मूर्ध्नि दत्तं भूतपते पदम् । इत्युक्त्वा सुप्रसन्नं तं भगवन्तं महेश्वरम् ॥ ११३ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामजी, सुप्रसन्न उन भगवान शंकरजी से यों कहकर नतमस्तक होकर मैंने जो कुछ वक्ष्यमाण रीति से कहा, उसे आप सुनिए