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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 114

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 29, verse 114 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 114

संस्कृत श्लोक

अवोचं प्रणतो भूत्वा यद्राम तदिदं शृणु । भगवंस्त्वत्प्रसादेन पूर्णा मे सकला दिशः ॥ ११४ ॥

हिन्दी अर्थ

हे भगवन्‌, यद्यपि आपकी अनुकम्पा से मेरे लिए समस्त दिशाएँ अभीष्ट पदार्थों से परिपूर्ण हैं; तथापि हे देवेश, एक मुझे जो सन्देह है, उसके विषय में आपसे निर्णय पूछता हूँ