Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 121
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 29, verse 121 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 121
संस्कृत श्लोक
न देवः कमलारूपी नापि देवो भवेन्मतिः ।
अकृत्रिममनाद्यन्तं देवनं देव उच्यते ॥ १२१ ॥
हिन्दी अर्थ
देह की शोभा भी देवरूप नहीं है और मति भी देवरूप नहीं है; किन्तु क्रियासाध्य वस्तु
से विलक्षण, आदि और अन्त से शून्य, निरतिशय आनन्दात्मक चित्प्रकाश ही देवस्वरूप है, यह
तत्त्वज्ञो द्वारा कहा जाता है (4)